छत्तीसगढ़

पीएम श्री स्कूल में पागल कुत्ते का हमला, छात्र और शिक्षिका घायल, नगर निगम की लापरवाही पर फूटा आक्रोश

बिलासपुर  । सरकंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत खमतराई स्थित पीएम श्री स्कूल में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक पागल कुत्ता अचानक स्कूल परिसर में घुस आया और लोगों पर हमला कर दिया। कुत्ते के हमले में पहली कक्षा का एक मासूम छात्र और एक शिक्षिका घायल हो गए। घटना के बाद स्कूल परिसर में दहशत का माहौल बन गया, वहीं बच्चों और अभिभावकों में भय और आक्रोश व्याप्त है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुत्ता अचानक स्कूल परिसर में घुस आया और इधर-उधर दौड़ते हुए लोगों पर हमला करने लगा। इसी दौरान पहली कक्षा का छात्र उसकी चपेट में आ गया, वहीं उसे बचाने की कोशिश कर रही एक शिक्षिका भी घायल हो गई। घटना के तुरंत बाद स्कूल प्रबंधन और स्थानीय लोगों की मदद से घायल छात्र और शिक्षिका को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां दोनों का उपचार जारी है। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों की हालत फिलहाल स्थिर है, हालांकि एहतियात के तौर पर जरूरी इंजेक्शन और इलाज दिया जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खमतराई और आसपास के इलाकों में पागल और आवारा कुत्तों का आतंक लंबे समय से बना हुआ है। बीते कुछ समय में कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आई हैं, जिनमें अब तक करीब 10 लोग घायल हो चुके हैं। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा आवारा कुत्तों की धरपकड़ और नियंत्रण को लेकर कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का आरोप है कि आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर नगर निगम में कई बार शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। जमीनी स्तर पर न तो कुत्तों को पकड़ने की मुहिम तेज की गई और न ही स्कूल जैसे संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा को लेकर कोई विशेष व्यवस्था की गई।

 

गौरतलब है कि शासन द्वारा स्कूल परिसरों में कुत्तों की निगरानी और बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों पर भी डाली गई थी, लेकिन विडंबना यह है कि अब शिक्षक खुद ही आवारा और पागल कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। इस घटना के बाद उक्त व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि आवारा और पागल कुत्तों पर तत्काल प्रभाव से नियंत्रण किया जाए। स्कूल परिसरों और रिहायशी इलाकों में विशेष अभियान चलाकर कुत्तों को पकड़ा जाए, नियमित निगरानी व्यवस्था बनाई जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस नीति और सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए।

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