कोरबा:प्रगति नगर बी-टाइप कॉलोनी में गहराया पेयजल संकट, ठेके और मेंटेनेंस पर उठे भ्रष्टाचार के सवाल

कोरबा। कोरबा जिले के गेवरा-दीपिका क्षेत्र अंतर्गत एसईसीएल की मेगा परियोजना दीपिका क्षेत्र के आवासीय परिसर प्रगति नगर बी-टाइप कॉलोनी में इन दिनों गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। हालात यह हैं कि एसईसीएल कर्मियों और उनके परिवारों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि प्रगति नगर कॉलोनी में हर वर्ष गर्मी के मौसम में जल संकट आम बात रही है, लेकिन इस बार भीषण ठंड के मौसम में भी पानी की किल्लत ने निवासियों की परेशानी और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से कॉलोनी की छतों पर लगी पुरानी कंक्रीट की पानी टंकियों को हटाकर सिंटेक्स टंकी लगाने का कार्य शुरू किया गया है, तभी से पेयजल समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है।
कर्मचारियों का आरोप है कि ठेके में जहां सिंटेक्स या पास्ता जैसी उच्च गुणवत्ता वाली कंपनी की टंकी और पाइपलाइन लगाने का प्रावधान है, वहीं जमीनी स्तर पर लोकल और घटिया गुणवत्ता की टंकियां व पाइपलाइन लगाई जा रही हैं। इससे न केवल पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, बल्कि ठेके में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई जा रही है।
निवासियों का कहना है कि जिस तरह से कार्य किया जा रहा है, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में भी कॉलोनी को पेयजल संकट से निजात मिलने की उम्मीद कम ही है। वहीं कॉलोनी में मेंटेनेंस व्यवस्था पहले से ही बदहाल है। रखरखाव से जुड़ी शिकायतें लगातार मेंटेनेंस कार्यालय में दर्ज कराई जा रही हैं।
यदि मेंटेनेंस कार्यालय के कंप्लेंट रजिस्टर की जांच की जाए, तो उसमें शिकायतों की भरमार देखने को मिलेगी, लेकिन इसके बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि कॉलोनी की हालत ऐसी हो गई है, मानो यह पूरी तरह लावारिस हो गई हो। कोई भी अधिकारी या प्रबंधन इस ओर गंभीरता से ध्यान देने को तैयार नहीं है।
ट्रेड यूनियन के कर्म नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने प्रबंधन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा है कि एसईसीएल प्रबंधन केवल कोयला उत्पादन में ही मस्त है, जबकि कर्मचारियों के सुख-दुख और बुनियादी सुविधाओं से उसका कोई सरोकार नहीं रह गया है। यदि समय रहते पेयजल समस्या और मेंटेनेंस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन की स्थिति भी बन सकती है।



