छत्तीसगढ़

बाल विवाह की कोशिश नाकाम : प्रशासन ने समय रहते रुकवाई नाबालिग की शादी

सूरजपुर । कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देश एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के मार्गदर्शन में सूरजपुर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने हेतु जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस एवं चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम द्वारा सतत निगरानी और कार्रवाई की जा रही है।

 

इसी क्रम में जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल को सूचना प्राप्त हुई कि कक्षा 12वीं में अध्ययनरत एक नाबालिग बालिका का विवाह उसके परिजनों द्वारा किए जाने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देश पर जायसवाल के नेतृत्व में संयुक्त टीम संबंधित गांव पहुँची।

 

 

 

प्रारंभिक पूछताछ में परिजनों द्वारा विवाह की जानकारी छिपाई गई, किंतु बालिका का पृथक कथन लेने पर यह सामने आया कि उसके विवाह को लेकर बातचीत हो चुकी है और लड़का भी तय कर लिया गया है। हालांकि तिथि निर्धारित नहीं हुई थी, लेकिन मुहूर्त आने पर विवाह कराने की योजना थी।

 

 

 

जांच में यह भी पता चला कि बालिका कक्षा 12वीं की छात्रा है और वह पिछले चार माह से स्कूल नहीं जा रही है, साथ ही उसने मुख्य परीक्षा का फार्म भी नहीं भरा है, जिससे वह इस वर्ष की परीक्षा से वंचित हो गई है।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी द्वारा बालिका के माता-पिता एवं परिजनों को समझाइश दी गई कि बालिका की शिक्षा प्राथमिकता है और 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने से पहले विवाह करना कानूनन अपराध है। परिजनों ने स्वीकार किया कि बालिका के स्कूल जाना बंद करने के कारण ही विवाह का निर्णय लिया गया था,

 

 

 

 

लेकिन अब वे 18 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही विवाह कराने पर सहमत हुए। इस संबंध में पंचनामा तैयार किया गया तथा उपस्थित सभी लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों और बाल विवाह से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी दी गई।

इस कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल, अंजली साहू, पर्यवेक्षक दीपा बैरागी, चाइल्डलाइन से प्रकाश राजवाड़े, दिनेश यादव, आरती राजवाड़े, रीता सिंह, पुलिस चौकी बसदेई से आरक्षक अशोक सिंह एवं अलका टोप्पो के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

 

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