छत्तीसगढ़

शहर के खंभों पर केबल का जाल सौ रुपए किराये के लिए सुरक्षा से खिलवाड़

 

रायपुर –   शहर में बिजली के खंभों पर मकड़ी के जाले की तरह फैले इंटरनेट और टीवी केबल्स ने शहर की व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। स्थिति यह है कि दो बड़ी कंपनियों के साथ स्थानीय केबल ऑपरेटरों ने बिजली के खंभों को पूरी तरह ढंक दिया है।

बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार शहर के करीब 51 हजार खंभों पर निजी कंपनियों के केबल लगे हैं। विभाग एक पोल के बदले सालभर का मात्र 100 रुपए किराया वसूल रहा है, लेकिन सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

बिना किसी तकनीकी मानक के खींचे गए ये केबल कई जगहों पर सड़क के काफी करीब आ गए हैं। कम ऊंचाई के कारण भारी वाहनों के इनमें फंसने का डर बना रहता है, वहीं दोपहिया वाहन चालक भी अक्सर इन लटकते तारों की चपेट में आकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। विभाग की इस लापरवाही के कारण न केवल लोगों की जान जोखिम में है।

फाइलों में बंद हैं विभाग की कई योजनाएं

बिजली विभाग पिछले कई वर्षों से केवल योजनाएं बनाने तक सीमित है, धरातल पर स्थिति जस की तस है। पुराने जर्जर तारों को हटाकर सुरक्षित एबी केबल लगाने का काम पिछले तीन साल से चल रहा है, जो आज तक पूरा नहीं हो सका।

केबल को व्यवस्थित करने योजना नहीं

विभाग ने सड़क के एक पोल से दूसरे पोल तक फैले तारों को व्यवस्थित करने का प्लान बनाया था, लेकिन करोना चौक, सदर बाजार, गोल बाजार, सिविल लाइन, और बृहस्पति बाजार जैसे प्रमुख इलाकों में आज भी तारों का अंबार लगा हुआ है।

नियमों की जगह- जगह अनदेखी

नियमों के मुताबिक जमीन से 3-4 मीटर की ऊंचाई तक खंभे पर कोई भी खुला तार नहीं होना चाहिए। इस हिस्से में केबल को जीआई या पीवीसी पाइप से कवर करना अनिवार्य है, जिसके बाद ही उसे इंसुलेटर पर फिक्स किया जाना चाहिए।

अव्यवस्थित तरीके से लगे केबल हटाए जाएंगे

कम ऊंचाई वाले बिजली के केबलों की जांच कराई जाएगी। जहां जरूरत होगी वहां केबल बदले जाएंगे और अव्यवस्थित तरीके से लगाए गए केबलों को भी हटवाया जाएगा।

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