छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट ने नशीली कफ सिरप तस्करी मामले में 4 आरोपियों सजा रखी बरकरार

 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने नशीली कफ सिरप रखने और तस्करी के मामले में सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। रमेश सिन्हा और रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने आरोपियों की अपील खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई में कोई त्रुटि नहीं पाई गई।

 

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि NDPS Act की धारा 50 केवल किसी व्यक्ति की निजी तलाशी पर लागू होती है, जबकि वाहन, बैग, कंटेनर या परिसर की तलाशी पर यह प्रावधान लागू नहीं होता। इसलिए आरोपियों की ओर से धारा 50 के पालन नहीं होने की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती।

 

 

जांच के दौरान स्नेहा गोयल के पास से एक प्लास्टिक बोरे में रखी कफ सिरप की 100 बोतलें (प्रत्येक 100 एमएल) बरामद हुईं। कुल मिलाकर आरोपियों के कब्जे से 145 बोतल नशीली कफ सिरप जब्त की गई।

इस मामले में सत्र न्यायालय ने सभी आरोपियों को 15 वर्ष की कठोर कारावास और डेढ़ लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे खारिज करते हुए अदालत ने सत्र न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है।

मामले के अनुसार 13 सितंबर 2023 को तोरवा थाने में पदस्थ एसआई भरत लाल राठौर को सूचना मिली थी कि एक महिला तीन लोगों के साथ हेमूनगर स्थित शोभा विहार इलाके में गैरकानूनी तरीके से नशीली कफ सिरप बेचने के लिए ले जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्नेहा गोयल, पुष्पेंद्र निर्मलकर, अमर जांगड़े और देवा रजक को हिरासत में लिया।

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