छत्तीसगढ़

नाबालिग से दुष्कर्म व वीडियो बनाने वाले दो दोषियों को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास

पेंड्रा।  जिले के गौरेला थाना क्षेत्र में नाबालिग किशोर के साथ दुष्कर्म कर उसका वीडियो बनाने के मामले में विशेष अपर सत्र न्यायालय पेंड्रारोड ने दो आरोपियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपराध को अत्यंत जघन्य बताते हुए सख्त टिप्पणी की।

 

विशेष न्यायाधीश  ज्योति अग्रवाल ने कोरबा निवासी आदेश उर्फ अंशु जॉन तथा बलौदाबाजार निवासी विकास मसीह उर्फ लाली को पॉक्सो एक्ट एवं भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया।

अभियोजन के अनुसार, 21 अप्रैल 2025 की रात लगभग 8 बजे पीड़ित किशोर अपने मित्र के घर जा रहा था। इसी दौरान दोनों आरोपियों ने उसे रास्ते में रोककर जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाया और सुमन निकेतन चर्च के पीछे स्थित जंगल में ले गए। वहां आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया तथा घटना का वीडियो भी बनाया। इसके बाद पीड़ित को जान से मारने की धमकी दी गई और मारपीट की गई।

 

पीड़ित की शिकायत पर गौरेला थाना में अपराध क्रमांक 103/2025 दर्ज कर विवेचना की गई। प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत होने पर सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी पाया गया।

 

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि नाबालिग के साथ इस प्रकार का कृत्य न केवल अमानवीय है, बल्कि इससे पीड़ित के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, इसलिए कठोर दंड आवश्यक है।

 

अदालत ने दोनों दोषियों को धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत 10-10 वर्ष के कठोर कारावास तथा 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड की राशि पीड़ित के उपचार एवं पुनर्वास हेतु प्रदान की जाएगी। राशि अदा नहीं करने की स्थिति में तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। अन्य धाराओं में दी गई सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक कौशल सिंह ठाकुर ने पैरवी की। उल्लेखनीय है कि घटना के लगभग 11 माह के भीतर न्यायालय द्वारा फैसला सुनाया गया।

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