
मनीष सोनी, संवाददाता
कोरबा/कटघोरा। नगर पालिका परिषद कटघोरा में 15वें वित्त मद से पाइपलाइन विस्तार कार्य में करोड़ों के खेल की बू आखिरकार बाहर आ ही गई। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद जब बिलासपुर से कार्यपालन अभियंता अली बख्श जांच के लिए कोरबा पहुंचे, तो मौके पर जो सामने आया उसने पूरे नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जांच के दौरान न सिर्फ कागजी दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर मिला, बल्कि भुगतान को लेकर भी बड़ा विरोधाभास सामने आया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सीएमओ मधुरिका प्रसाद तिवारी ने लिखित रूप से यह दावा किया था कि संबंधित पाइपलाइन कार्य के लिए ठेकेदार को किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया गया है। लेकिन जब कार्यपालन अभियंता अली बख्श ने मौके पर ही ऑनलाइन पोर्टल की जांच की, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। पोर्टल में स्पष्ट रूप से दर्ज था कि कुल स्वीकृत राशि का 50 प्रतिशत से अधिक भुगतान पहले ही किया जा चुका है।
जानकारी के अनुसार, करीब 80 लाख रुपये के इस पाइपलाइन विस्तार कार्य में से लगभग 44 लाख रुपये का भुगतान पहले ही जारी कर दिया गया था, जबकि जमीनी स्तर पर काम लगभग न के बराबर था। यह तथ्य सामने आते ही सीएमओ के दावे पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ गए और मौके पर मौजूद अधिकारियों के बीच भी असहज स्थिति बन गई।
शिकायतकर्ता अनिल अग्रवाल ने बताया कि वार्ड क्रमांक 4, 5 और 10 सहित अन्य क्षेत्रों में ओपीवीसी पाइपलाइन विस्तार के नाम पर करीब 36 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी, वहीं वार्ड 8 और 15 में लगभग 41 लाख रुपये के कार्य को मंजूरी दी गई थी। इन कार्यों के लिए बाकायदा निविदा प्रक्रिया पूरी की गई और कार्यादेश भी जारी हुआ, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्य नहीं कराया गया।
आरोप यह भी है कि बिना कार्य कराए ही भुगतान निकाल लिया गया और संबंधित लोगों के बीच बंदरबांट कर दी गई। यही नहीं, जब मामला उजागर होने लगा और जांच की भनक लगी, तो अचानक रातों-रात मशीनें लगाकर गड्ढे खोदने और पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस काम को महीनों पहले पूरा दिखाया गया था, वह वास्तव में जांच के एक दिन पहले ही शुरू हुआ।
कार्यपालन अभियंता अली बख्श ने मौके पर स्थिति का जायजा लेने के बाद स्पष्ट संकेत दिए कि मामला गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर दर्ज भुगतान और स्थल पर किए गए कार्य में स्पष्ट अंतर है, जिसकी विस्तृत जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक सवाल सीएमओ मधुरिका प्रसाद तिवारी की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। एक तरफ उन्होंने लिखित में भुगतान नहीं होने की बात कही, वहीं दूसरी तरफ आधे से अधिक भुगतान का रिकॉर्ड सामने आ गया। इससे यह संदेह और गहरा गया है कि कहीं न कहीं जानबूझकर सच्चाई छिपाने की कोशिश की गई।
मामले के सामने आने के बाद सीएमओ मीडिया से दूरी बनाते नजर आए और किसी भी तरह की स्पष्ट प्रतिक्रिया देने से बचते रहे। इससे यह धारणा और मजबूत हो रही है कि नगर पालिका के भीतर कुछ बड़ा गड़बड़झाला हुआ है, जिसे अब छिपाना मुश्किल हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई की तैयारी चल रही है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ निलंबन तक की कार्रवाई संभव मानी जा रही है। अगर जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला सिर्फ एक नगर पालिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में 15वें वित्त के कार्यों की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।
फिलहाल पूरे मामले की नजरें अब कार्यपालन अभियंता अली बख्श की विस्तृत जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यह रिपोर्ट तय करेगी कि इस “भुगतान के खेल” में कौन-कौन शामिल था और किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी। लेकिन इतना तय है कि कटघोरा नगर पालिका में हुआ यह खुलासा आने वाले दिनों में बड़े प्रशासनिक एक्शन की भूमिका तैयार कर चुका है।



