सरकारी जमीन पर पेड़ लगाए तो मिला नोटिस, तहसीलदार ने लगाया जुर्माना सारसमाल का मामला

रायगढ़ । शहरों में सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से अतिक्रमण किया जा रहा है लेकिन कोई चूं तक नहीं हो रही है। वहीं गांवों में सरकारी जमीन पर कोई आम का पेड़ लगा दे या सरसों उगा ले तो अवैध कब्जे का नोटिस पहुंच जाता है। यह मामला एक साथ दो न्यायालयों में चलाया जा रहा है। जबकि एक न्यायालय में जुर्माना भुगतान भी किया जा चुका है।
यह मामला तमनार के सारसमाल का है। खसरा नंबर 90/4 रकबा 11.002 हे. भूमि बड़े झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज है। इस भूमि पर गांव के पांच लोगों ने आम और सागौन के पौधे रोपे हैं। कुछ हिस्से में सरसों की खेती गई है। किसी भी तरह का कोई निर्माण नहीं किया गया है। बीडीसी चुनाव हारे हुए प्रत्याशी अनिल गुप्ता ने अतिक्रमण की शिकायत की थी। इस पर पहले तहसीलदार तमनार ने पटवारी से प्रतिवेदन प्राप्त किया। प्लांटेशन करने वालों में एक नाम जनपद सदस्य पति भी है। इसलिए तमनार तहसीलदार ने नोटिस जारी किया। जवाब में उसने कहा कि वृक्षारोपण तो गांव के हित में किया गया है। किसी का व्यक्तिगत लाभ इसमें नहीं हो रहा।
सरसों की खेती किसी और ने की है। तहसील न्यायालय से जुर्माना भी लगाया गया। अनावेदक ने जुर्माना भी चुका दिया है, लेकिन अब कलेक्टर न्यायालय से नोटिस जारी किया गया है। एक कोर्ट से मामला खत्म होने के बाद अब दूसरे न्यायालय ने सुनवाई शुरू हो गई है। इस पूरे मामले ने अब एक कानूनी बहस को जन्म दे दिया है। ग्रामीणों का तर्क है कि जहां एक ओर सरकार ‘हरियर छत्तीसगढ़’ जैसे अभियानों के जरिए वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लगाए गए पौधों को ‘अतिक्रमण’ की श्रेणी में रखकर दंडित किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है, जब तहसीलदार न्यायालय में मामला सुलझ चुका था और जुर्माना भी अदा कर दिया गया था, तो उसी कृत्य के लिए कलेक्टर न्यायालय से दोबारा नोटिस जारी करना न्यायसंगत है या नहीं? दोहरे न्यायिक संकट में फंसे ग्रामीण अब इस असमंजस में हैं कि भविष्य में सामुदायिक भलाई के लिए उठाए गए कदम कहीं उनके लिए जी का जंजाल न बन जाएं।



