छत्तीसगढ़रोचक तथ्य

चावल परिवहन टेंडर में नियमों की अनदेखी ! पाली प्रदाय केंद्र के टेंडर में नागरिक आपूर्ति निगम पर उठे गंभीर सवाल

कोरबा | 29 जनवरी 2026

कोरबा जिले के पाली प्रदाय केंद्र में चावल परिवहन कार्य के लिए की गई
द्वितीय ई-निविदा प्रक्रिया अब विवादों में घिरती नजर आ रही है।
वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के लिए जारी इस निविदा में नान के अधिकारियों द्वारा भंडार क्रय नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
आरोप है कि तकनीकी खामियों के बावजूद निविदा को आगे बढ़ाकर ठेका आबंटित कर दिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पाली प्रदाय केंद्र में चावल परिवहन हेतु
08 दिसंबर 2025 को द्वितीय ई-निविदा आमंत्रित की गई थी, जिसकी अंतिम तिथि
29 दिसंबर 2025 निर्धारित थी। इस निविदा प्रक्रिया में केवल
दो फर्मों ने भाग लिया, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि द्वितीय निविदा की स्थिति में
तकनीकी बिड की पूरी जांच के बाद ही फाइनेंशियल बिड खोली जा सकती है।
इसके अलावा यदि तकनीकी बिड में कोई भी निविदाकार अपात्र पाया जाता है, तो
दूसरे निविदाकार की फाइनेंशियल बिड भी नहीं खोली जा सकती और
तृतीय निविदा आमंत्रित करना अनिवार्य होता है।

लेकिन पाली मामले में इन नियमों का पालन होता नजर नहीं आया।
बजरंगबली ट्रांसपोर्ट द्वारा प्रस्तुत वाहन संबंधी दस्तावेजों में यह तथ्य सामने आया कि
वाहन फर्म के नाम पर पंजीकृत न होकर अनुरुद्ध जायसवाल के नाम पर दर्ज थे।
जबकि निविदा शर्तों के अनुसार यदि निविदाकार फर्म है, तो परिवहन में प्रयुक्त वाहन
उसी फर्म के नाम पर पंजीकृत होना आवश्यक है।

इसके बावजूद क्रय समिति द्वारा दोनों फर्मों को तकनीकी रूप से पात्र मान लिया गया और
फाइनेंशियल बिड खोल दी गई। अंततः चावल परिवहन का ठेका
जैन की उस फर्म को दे दिया गया, जो पूर्व में भी पाली प्रदाय केंद्र में
यह कार्य कर चुकी है

बताया जा रहा है कि पूर्व में जैन की फर्म के कार्यकाल के दौरान भी परिवहन व्यवस्था को लेकर
शिकायतें सामने आती रही थीं। इसके बावजूद उसी फर्म को दोबारा ठेका दिए जाने से
यह संदेह और गहराता जा रहा है कि निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही।

मामले को लेकर वर्तमान परिवहनकर्ता हर्षित तिवारी ने
समिति के अध्यक्ष एवं अपर कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए
पूरी निविदा प्रक्रिया की जांच की मांग की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि
जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या नियमों के उल्लंघन पर
कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।

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