भव्या को न्याय दो, मुड़ापार हत्याकांड पर भी जवाब दो! दो दर्दनाक घटनाओं से उबला कोरबा, छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने कलेक्टर-SP को सौंपा ज्ञापन, फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सुरक्षा की मांग

रजगामार की 7 वर्षीय भव्या जोशी की हत्या और मुड़ापार दशहरा चाकूबाजी में युवक की मौत से आक्रोशित संगठन ने उठाई आवाज; दोषियों को कठोर सजा, बच्चों की सुरक्षा और त्योहारों में पुलिस की पुख्ता व्यवस्था की मांग, कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी।
कोरबा। एक तरफ सात साल की मासूम भव्या जोशी की हत्या से एक परिवार का संसार उजड़ गया, दूसरी तरफ मुड़ापार दशहरा उत्सव में चाकूबाजी की घटना ने सार्वजनिक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए। दो दर्दनाक घटनाओं को लेकर अब सामाजिक संगठनों का आक्रोश प्रशासन तक पहुंच गया है। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने सतनामी समाज के पदाधिकारियों के साथ मिलकर कलेक्टर और पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने साफ कहा है कि मासूमों की सुरक्षा और आम नागरिकों की जान की हिफाजत केवल आश्वासनों से नहीं, ठोस कार्रवाई से सुनिश्चित होनी चाहिए।
भव्या हत्याकांड: मासूम के लिए न्याय की मांग तेज
रजगामार क्षेत्र में 19 अक्टूबर 2026 को सात वर्षीय भव्या जोशी लापता हुई थी। लगातार तलाश के बाद 22 अक्टूबर को पुरानी बस्ती के पीछे पुराने ईंट-भट्ठे के समीप जंगल में उसका शव बरामद हुआ। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।
संगठन ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, उस उम्र में ऐसी वारदात समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने मामले की वैज्ञानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषी को कठोरतम सजा दिलाने की मांग की है। साथ ही मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में विचारण कराने और पीड़ित परिवार को जल्द न्याय दिलाने की मांग भी उठाई है। संगठन ने आरोपी को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है, हालांकि सजा का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और कानून के अनुसार होगा।
मुड़ापार दशहरा चाकूबाजी: उत्सव के बीच मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मानिकपुर चौकी क्षेत्र के मुड़ापार में दशहरा उत्सव के दौरान हुई चाकूबाजी में एक युवक की मौत ने भी लोगों को झकझोर दिया। धार्मिक और सार्वजनिक आयोजन के बीच हुई इस वारदात ने भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
संगठन ने मांग की है कि मेलों, त्योहारों, सार्वजनिक आयोजनों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए। संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखी जाए और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
दिलीप मिरी, अतुल दास और उमागोपाल के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन
ज्ञापन सौंपने के दौरान छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के प्रदेश संयोजक दिलीप मिरी, कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष अतुल दास और प्रदेश उपाध्यक्ष उमागोपाल के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने घटनाओं पर चिंता जताई।
कोरबा सतनामी समाज के पदाधिकारी त्रिवेंद्र आदिले, मनोद मनहर और आशीष बंजारे भी इस मुहिम में शामिल रहे। संगठन के जिला अध्यक्ष अलेक्स टोप्पो ने चेतावनी दी कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच और न्याय की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन कड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।
प्रशासन के सामने चार बड़ी मांगें
1. भव्या हत्याकांड की निष्पक्ष जांच: सभी वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी कर दोषी को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाई जाए।
2. फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई: मामले की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित कर पीड़ित परिवार को समयबद्ध न्याय दिलाया जाए।
3. बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा: स्कूलों, संवेदनशील क्षेत्रों, मेलों और त्योहारों में पुलिस गश्त, निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
4. भविष्य की घटनाओं पर रोक: आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना पर तत्काल कार्रवाई हो सके।
मुख्यमंत्री से लेकर DGP तक भेजी ज्ञापन की प्रतिलिपि
संगठन ने ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक (DGP), पुलिस अधीक्षक कोरबा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी है।
अब सवाल यह है कि इन गंभीर घटनाओं के बाद प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कौन से ठोस कदम उठाता है। भव्या के परिवार को न्याय दिलाने की मांग हो या सार्वजनिक आयोजनों में नागरिकों की सुरक्षा, दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा बढ़ गई है।



