Jal Jeevan Mission ने जारी किया ₹6,836 करोड़ भुगतान का हिसाब, फिर भी ठेकेदारों के बकाया पर सवाल

रायपुर/कोरबा– जल जीवन मिशन में भुगतान को लेकर ठेकेदारों की नाराजगी और आंदोलन के बीच सरकार की ओर से करोड़ों रुपये के भुगतान का आंकड़ा सामने आ गया है। विभाग ने बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बता दिया कि पिछले तीन वर्षों में 6,836.51 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। आंकड़ा इतना बड़ा है कि पहली नजर में लगेगा, मानो भुगतान की गंगा बह रही हो। लेकिन ठेकेदारों के आंदोलन की आवाज सुनकर सवाल उठता है कि अगर सब कुछ इतना ही व्यवस्थित है, तो फिर असंतोष की वजह क्या है?
अब इसे ठेकेदारों के आंदोलन का दबाव कहें या विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट करने की कवायद, सरकारी आंकड़ों ने चर्चा जरूर छेड़ दी है। हालांकि, सरकार ने यह आंकड़ा आंदोलन के दबाव में ही जारी किया है, ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
तीन साल में हजारों करोड़ का भुगतान, फिर ठेकेदार परेशान क्यों?
जल जीवन मिशन के राज्य कार्यालय के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में एकल ग्राम जलप्रदाय योजनाओं के लिए 4,985.35 करोड़ रुपये और समूह जलप्रदाय योजनाओं के लिए 1,690.94 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। सपोर्ट मद में 136.18 करोड़ और जल गुणवत्ता जांच के कार्यों में 24.04 करोड़ रुपये दिए गए।
कुल जोड़कर 6,836.51 करोड़ रुपये का भुगतान!
आंकड़े देखकर सरकारी फाइलों को तो राहत मिल सकती है, लेकिन आंदोलन कर रहे ठेकेदारों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब केवल कुल भुगतान का आंकड़ा नहीं है। असली सवाल यह है कि किस ठेकेदार को कितना भुगतान मिला, किसका कितना बकाया है और भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार कौन है?
612 करोड़ का आबंटन, लेकिन जारी हुए सिर्फ 162.46 करोड़!
विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष का हिसाब भी सामने रखा है। एकल ग्राम योजनाओं के भुगतान के लिए 612 करोड़ रुपये का आबंटन प्राप्त हुआ, जिसके विरुद्ध अब तक 162.46 करोड़ रुपये जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।
यानी आबंटित राशि और जारी राशि के बीच अभी 449.54 करोड़ रुपये का अंतर है। यह राशि आगे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी हो सकती है, लेकिन फिलहाल सवाल यही है कि भुगतान की रफ्तार कितनी तेज होगी और ठेकेदारों को राहत कब मिलेगी?
सरकारी भाषा में इसे ‘भुगतान की प्रक्रिया निरंतर जारी’ कहा जा रहा है। ठेकेदारों की भाषा में सवाल कुछ ऐसा हो सकता है कि साहब, प्रक्रिया तो चल रही है, मगर भुगतान आखिर कब चलेगा?
आंकड़ों की सफाई या ठेकेदारों को भरोसा दिलाने की कोशिश?
जल जीवन मिशन में करोड़ों रुपये के भुगतान का विवरण जारी होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। मगर कुल भुगतान का आंकड़ा और किसी ठेकेदार की लंबित देनदारी दो अलग-अलग बातें हैं। तीन वर्षों में हजारों करोड़ रुपये खर्च होने का अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक ठेकेदार का भुगतान भी समय पर हो गया।
यदि भुगतान नियमित है, तो विभाग को आंदोलनरत ठेकेदारों की शिकायतों, लंबित बिलों और भुगतान की समयसीमा का भी स्पष्ट ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए। इससे तस्वीर केवल करोड़ों के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी पता चलेगा कि जमीनी स्तर पर भुगतान की स्थिति क्या है।
