छत्तीसगढ़

ओडिशा: अदाणी कंपनी के प्रतिनिधियों को ग्रामीणों ने बनाया बंधक, खनन के लिए पहाड़ियों के ड्रोन सर्वे का विरोध

बलदा पहाड़ियों में ड्रोन सर्वे का विरोध, ग्रामीणों ने सर्वे टीम को घेरा

कोरापुट।  पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन को लेकर कोरापुट जिले के नंदपुर ब्लॉक स्थित बलदा पहाड़ी क्षेत्र में मंगलवार को तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। बलदा पहाड़ियों में कथित ड्रोन सर्वे किए जाने की सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और सर्वे का जोरदार विरोध किया। ग्रामीणों ने सर्वे टीम को घेर लिया तथा अदाणी समूह के प्रतिनिधि दिलीप परिच्छा और प्रमोद हियाल सहित अन्य कर्मचारियों को कुछ समय के लिए रोक लिया। सूचना मिलने पर पाडुआ पुलिस मौके पर पहुंची और सर्वे टीम के सदस्यों को ग्रामीणों के बीच से सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस ने ग्रामीणों द्वारा रोके गए ड्रोन और वाहनों को भी जब्त कर लिया। इसके बाद मौके पर चल रहा सर्वे कार्य रोक दिया गया।

बलदा पहाड़ी संरक्षण समिति ने इस संबंध में पाडुआ थाने में शिकायत देकर ड्रोन सर्वे की अनुमति और उसके उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए हैं। समिति का आरोप है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में स्थित पहाड़ियों का सर्वे ग्रामीणों को पूर्व सूचना दिए बिना किया जा रहा था। थाना प्रभारी टूना पिडिका ने समिति की शिकायत प्राप्त की है। समिति अध्यक्ष अजय मुदुली और बिजय कुमार के नेतृत्व में चिलम, कंतासारू, खड़ापुट, कंधागुड़ा, तैनतार और बलदा सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण सर्वे का विरोध करने पहुंचे थे।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ड्रोन सर्वे किस विभाग या प्राधिकरण की अनुमति से किया जा रहा है और इसका वास्तविक उद्देश्य क्या है। ग्रामीणों ने पेसा कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि प्रस्तावित बॉक्साइट खनन गतिविधियों के बीच सर्वे से पहले ग्रामसभा को इसकी जानकारी दी गई थी या नहीं, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। बलदा, भेजा, बादेल, अटांडा और कुलबीर पंचायतों के ग्रामीण पहले से ही प्रस्तावित खनन के लिए आयोजित ग्रामसभा और जनसुनवाई को लेकर विरोध जता रहे हैं।

बलदा पहाड़ी संरक्षण समिति का आरोप है कि सीएसआर गतिविधियों के नाम पर कंपनी से जुड़े अधिकारी लगातार आसपास के गांवों में पहुंच रहे हैं और ग्रामीणों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। समिति के अनुसार, कुछ दिन पहले बलदा क्षेत्र में अदाणी समूह की मोबाइल स्वास्थ्य सेवा के वाहन का भी ग्रामीणों ने विरोध किया था। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बलदा की पहाड़ियों और गुफाओं को वर्ष 2008 में पर्यावरण पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता दी गई थी। बाद में क्षेत्र को खनन के लिए चिह्नित किया गया और नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से अदाणी समूह को खनन अधिकार मिलने की जानकारी सामने आई।

ड्रोन सर्वे के विरोध के बाद अब बलदा पहाड़ियों में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन को लेकर ग्रामीणों की चिंताएं एक बार फिर सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की जमीन, पहाड़ियों और सामुदायिक संसाधनों से जुड़े किसी भी निर्णय में स्थानीय लोगों और ग्रामसभा की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं, सर्वे की अनुमति, ड्रोन सर्वे का उद्देश्य तथा पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के प्रावधानों के पालन को लेकर उठे सवालों पर संबंधित विभागों और प्रशासन की स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।

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