चुलबुल पांडे के एरिया में रोज डीजल चोरी! आनंद के साथ लग रही बोली, प्रोटेक्शन मनी वसूली की चर्चा ने महकमे में मचाई खलबली

कुसमुंडा खदान में कथित डीजल चोरी और प्रोटेक्शन मनी वसूली की चर्चाओं ने मचाई खलबली। आनंद के नाम से जुड़े दावों पर उठे सवाल, जांच पर टिकी नजर।
कोरबा। Korba News: कुसमुंडा खदान का इलाका एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा कोयले की नहीं, बल्कि डीजल की कटती-बंटती बूंदों और कथित संरक्षण के खेल की है। खबरीलाल की खबरची डायरी में दर्ज चर्चाओं के मुताबिक, कुसमुंडा खदान क्षेत्र में डीजल चोरी का खेल फिर सिर उठाता नजर आ रहा है। सवाल सीधा है, अगर रोज चोरी की चर्चा है तो निगरानी तंत्र आखिर कर क्या रहा है?
कभी कबाड़ के कथित खेल को लेकर चर्चा में रहा यह इलाका अब डीजल को लेकर नई चर्चाओं का केंद्र बन गया है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि पुराने खेल से जुड़े कुछ चेहरे नए समीकरणों के साथ सक्रिय होने की कोशिश में हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आनंद के साथ डीजल की ‘लग बोली’!
खबरीलाल की खबरची डायरी में एक नाम बार-बार सुनाई दे रहा है, आनंद। चर्चा है कि डीजल चोरी के कथित नेटवर्क के साथ आनंद का नाम जोड़ा जा रहा है। आखिर आनंद की भूमिका क्या है? क्या वास्तव में उसका इस कथित नेटवर्क से कोई संबंध है या फिर सिर्फ नाम हवा में उछाला जा रहा है? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा,लेकिन असली सवाल इससे बड़ा है।
अगर खदान क्षेत्र में डीजल चोरी की गतिविधियां लगातार चल रही हैं तो डीजल बाहर निकल कैसे रहा है? वाहन कौन उपलब्ध करा रहा है? रास्ता कौन दिखा रहा है? माल कहां पहुंच रहा है? और सबसे अहम, इतनी गतिविधियों के बावजूद जिम्मेदारों की नजर वहां तक क्यों नहीं पहुंच रही?
चुलबुल पांडे के एरिया में ‘चढ़ावे’ की चर्चा!
मामला यहीं खत्म नहीं होता। इलाके में कथित प्रोटेक्शन मनी को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। खबरीलाल के मुताबिक, कुछ लोग इसे ‘चढ़ावा’ कहकर रकम के हिसाब-किताब की बातें कर रहे हैं। हालांकि इस दावे की पुष्टि फिलहाल किसी आधिकारिक जांच या दस्तावेज से नहीं हुई है।
यदि संरक्षण के नाम पर रकम वसूली की बात सही निकलती है तो मामला महज डीजल चोरी तक सीमित नहीं रहेगा। फिर जांच का दायरा कथित चोरी, परिवहन, खरीदार और संरक्षण देने वाले नेटवर्क तक पहुंचना चाहिए।
डीजल की चोरी या सिस्टम की आंखों में धूल?
कुसमुंडा खदान में डीजल की खपत, वाहनों की आवाजाही और स्टॉक का मिलान करा दिया जाए तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं, प्रवेश और निकासी का रिकॉर्ड देखा जाए और डीजल की वास्तविक खपत का हिसाब मिलाया जाए। फिर पता चलेगा कि मामला सिर्फ बाजार में उड़ रही चर्चा है या वाकई डीजल की बूंद-बूंद के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है।
बोली कौन लगा रहा है और सुन कौन रहा है?
खबरीलाल का सवाल अब सीधा है…खदान का डीजल सरकारी हिसाब से खर्च हो रहा है या चोरी के कथित कारोबार में पिघल रहा है? और अगर चुलबुल पांडे के एरिया में सचमुच रोज डीजल की ‘बोली’ लगने की चर्चा है, तो फिर सवाल यह भी है कि बोली लगाने वाला कौन है और बोली सुनने वाला कौन?
अब निगाहें पुलिस, एसईसीएल प्रबंधन और सुरक्षा तंत्र पर हैं। क्या जांच होगी, रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे और चर्चाओं पर विराम लगेगा, या फिर कुसमुंडा की फाइल में एक बार फिर सब कुछ ‘ऑल इज वेल’ लिख दिया जाएगा?



