उतरदा समिति में लता-प्रीति-समुंद-शैलेन्द्र दोषी पाए गए, प्रमाणित घोटालों पर कार्रवाई लम्बित

धान खरीदी से लेकर वेतन और खाद घोटाले से रंगे हैं हाथ
कलेक्टर जनदर्शन में हुई शिकायत पर जाँच पूरी
कोरबा-हरदीबाजार। कोरबा जिले के पाली अनुविभाग अंतर्गत आने वाले ग्राम उतरता हरदी बाजार में धान खरीदी के दौरान किए गए घोटालों और वित्तीय अनियमितता पर विधिवत और विभागीय कार्रवाई आज पर्यंत लंबित ही है। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता कहें या फिर दोषियों को बचाने की कोशिश, प्रमाणित अपराध में भी उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं किया जाना कई तरह के संदेह उत्पन्न करता है। इन दोषियों के विरूद्ध सहकारिता अधिनियम 1960 सेवा नियम 2018 एवं उपविधि में निहित प्रावधानों के तहत् कार्यवाही करने के संबंध में उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, कोरबा को जांच प्रतिवेदन प्रेषित किया जा चुका है किंतु अब तक कार्रवाई की सुगबुगाहट और उसका सार्वजनिक किया जाना शेष ही है।
कलेक्टर जनदर्शन में 31 अगस्त 2026 को सरपंच, उपसरपंच ग्राम पंचायत उतरदा, जनपद पंचायत पाली एवं अन्य द्वारा पदीय कर्तव्यों के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता, यूरिया खाद की हेराफेरी तथा दोषी कर्मचारियों को अनुचित संरक्षण देने संबंधी गंभीर आरोप लगाए गए।
लता सिदार को सेवा से पृथक करें
शिकायत में बताया गया कि धान खरीदी वर्ष 2024-25 में उपार्जन केन्द्र उतरदा में 757 बोरी धान की अनियमितता करने पर प्रभारी संस्था प्रबंधक लता सिदार के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज हुआ है। जिसे सिर्फ प्रबंधक पद से पृथक किया गया है। सहकारिता विस्तार अधिकारी द्वारा संरक्षण दिये जाने का आरोप लगाया गया है तथा शिकायतकर्ताओं द्वारा लता सिदार को सेवा नियम 2018 के तहत सेवा से पृथक करने की मांग की गई है।
पत्नी को कम्प्यूटर ऑपरेटर बनाया
शिकायत बिन्दु क्रमांक 02 में लेख है कि लता सिदार के बाद प्रबंधक का दायित्व तुलाराम यादव प्रबंधक नवीन संवर्ग को दिया जाना था किन्तु सहकारिता सीईओ के द्वारा लता सिदार के भाई समुंद सिंह सरोते प्रभारी संस्था प्रबंधक कोरबी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया। उतरदा समिति के प्रभारी प्रबंधक रहते हुये समुंद सिंह सरोते द्वारा अपनी पत्नी को अतिरक्त कम्प्युटर ऑपरेटर बता कर लाखो रूपये वेतन का भुगतान करने तथा कानूनी खर्च के नाम पर 50000 रू. आहरण किया गया है, जिसे समिति के खाते में वसूली करने व वैधानिक कार्यवाही करने की मांग किया गया है।
एक ट्रक यूरिया खाद की हेराफेरी
शिकायतकर्ताओं द्वारा आरोप लगाया गया कि खरीफ वर्ष 2024-25 में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कोरवी (धतुरा) में 01 ट्रक यूरिया का हेरा फेरीकर 500 किसानो द्वारा बिना कर्ज लिये एक-एक बोरी फर्जी यूरिया खाद की एन्ट्री का आरोप लगाया गया है, तथा दोषी कर्मचारियो के विरूद्ध सेवा नियम 2018 के तहत कार्यवाही की मांग किया गया है।
जाँच में सही पाए गए आरोप, कार्रवाई की अनुशंसा
जनदर्शन में हुए शिकायत की जांच पाली एसडीएम रोहित सिंह के द्वारा की गई। उनके द्वारा जांच में पाया गया कि धान खरीदी वर्ष 2024-25 में लता सिदार प्रभारी प्रबंधक एवं फड़ प्रभारी द्वारा धान उपार्जन केन्द्र उतरदा के भौतिक सत्यापन में 9210 बोरी धान कम पाया गया था, जिसकी अनुमानित लागत 1 करोड़ 14 लाख 20 हजार 400 रूपये है, जिसकी एफ.आई.आर. भून्पेन्द्र कुमार साहू, सहकारिता विस्तार अधिकारी, पाली द्वारा कराया गया है। एफ.आई.आर दर्ज होने के उपरान्त नियमानुसार लता सिदार को सेवा से पृथक किया जाना था किन्तु लता सिदार आज भी संस्था में कार्यरत है। अतः एफ.आई.आर दर्ज कर्मचारी लता सिदार को सेवा नियम 2018 के प्रावधानों के तहत कार्यवाही किये जाने की अनुशंसा की गई है।
नौकरी 11 महीने, वेतन 17 माह का दिया
जांच में पाया गया कि धान खरीदी वर्ष 2024-25 में तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक लता सिदार के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज होने के उपरान्त धान खरीदी प्रक्रिया का सुचारू संचालन/संपादन एवं प्रबंधकीय कार्य हेतु कार्यालय उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं जिला कोरबा (छ०ग०) के पत्र क्रमांक/उपको/साख/2025/227/कोरबा दिनांक 21. 03.2025 के द्वारा समुंद सिंह सरोते प्रभारी प्रबंधक आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्या. कोरबी पंक्रं. 304 को उतरदा समिति का अतिरिक्त कार्यप्रभार दिये जाने हेतु पत्र जारी किया गया।
समुंद सिंह ने अपनी पत्नी श्रीमति प्रीति सुरूते को समिति उतरदा के कार्यसंचालन कमेटी द्वारा संस्था की कार्यवाही दिनांक 02.11.2024 के प्रस्ताव क्रमांक 01 के अनुसार बारदाना प्रभारी रखवाया। समिति के कम्प्युटर ऑपरेटर हड़ताल में जाने के कारण संस्था की कार्यवाही दिनांक 12.12.2024 को वैकल्पित कम्प्युटर आपरेटर के तहत श्रीमति प्रीति सरूते को रखने की कार्यवाही की गई, तथा कार्य संचालन कमेटी द्वारा संस्था की कार्यवाही दिनांक 22.10.2025 को प्रस्ताव पारित कर श्रीमति प्रीति सरूते को सेवा से पृथक करने की कार्यवाही किया जाना पाया गया। इस प्रकार श्रीमति प्रीति सरूते द्वारा समिति उतरदा में कुल 11 माह 21 दिन कार्य करने का प्रमाण मिला, जबकि संस्था की कार्यवाही दिनांक 29.03.2025 को कार्य संचालन कमेटी (प्रभारी प्रबंधक समुंद सिंह सरोते तथा अशासकीय प्राधिकृत अधिकारी शत्रुहन सिंह करपे) द्वारा नवम्बर 2023 से मार्च 2025 तक का वेतन 12000/- प्रतिमाह की दर से 2,04,000/- रू. श्रीमति प्रीति सरूते को वेतन भुगतान किया जाना पाया गया। इस तरह प्राप्त योग्य वेतन से 63,600/-अधिक का भुगतान किया जाना पाया गया। जो वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता हैं, जिस हेतु तत्कालीन प्रभारी संस्था प्रबंधक समुंद सिंह सरोते उत्तरदायी है। यह राशि समुंद सिंह सरोते तथा तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी शत्रुहन सिंह करपे से वसूली योग्य है तथा प्रभारी प्रबंधक समुंद सिंह सरोते को उक्त कृत्य सेवा नियम 2018 के नियम क्रमांक 16.4 एवं 16.5, के उप नियम 02 व 03 अनुसार कार्यवाही की अनुशंसा की गई है।
किसानों की संख्या घटाकर खाद घोटाला प्रमाणित
इसी कड़ी में वर्तमान समिति प्रबंधक घनश्याम जायसवाल द्वारा जांच अधिकारी एसडीएम को यह जानकारी उपलब्ध कराया गया कि वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 मे खाद का वितरण समुंद सिंह सरोते तत्कालीन प्रभारी संस्था प्रबंधक तथा खाद की आनलाइन एन्ट्री कम्प्युटर ऑपरेटर शैलेन्द्र राठौर द्वारा किया गया। उपलब्ध सूची में वर्ष 2024-25 में कुल 496 किसानों को 4280 बोरी यूरिया तथा वर्ष 2025-26 में कुल 575 किसानो को 5347 बोरी यूरिया खाद वितरण करने का उल्लेख है। जबकि कार्यालय उप संचालक कृषि जिला कोरबा द्वारा उलब्ध पॉस सेल सूची खरीफ 2024-25 अनुसार 1248 किसानों को 4280 बोरी यूरिया तथा 2025-26 में 597 किसानों को 5347 बोरी यूरिया वितरण किया प्रदर्शित है। इस तरह समिति व कृषि कार्यालय की सूची में यूरिया की मात्रा एक समान है किन्तु किसानों की संख्या में भिन्नता है। इस अनियमितता हेतु खाद वितरण एवं आनलाईन प्रवृष्टि हेतु अधिकृत समिति कर्मचारी समुंद सिह सरोते एवं कम्प्युटर ऑपरेटर शैलेन्द्र राठौर के विरुद्ध सेवा नियम 2018 के नियम क्रमांक 16.4 एवं 16.5, के उप नियम 02 व 03 अनुसार कार्यवाही की अनुशंसा की गई है।
सदस्य अरुण की भी शिकायत
शिकायत में समिति उतरदा के सदस्य अरूण राठौर पर समिति में बैठकर अपने चहेतों के माध्यम से लंबे समय से किसानों का दोहन करने तथा किसानों के हित में अरूण राठौर की प्राथमिक सदस्यता खत्म करने तथा तुलाराम यादव पूर्व संस्था प्रबंधक को पुनः उतरदा समिति में नियुक्त करने की मांग की गई। इसकी जांच में समिति के भौतिक सत्यापन के दौरान कई बार अरूण कुमार राठौर को समिति उतरदा में उपस्थित पाया गया तथा ग्रमीणों द्वारा कई बार अरूण राठौर के विरूद्ध समिति से संबंधित कार्य में बाधा रूकावट की शिकायत की गई है। माना गया कि अरूण कुमार राठौर का संस्था में सदस्य बने रहना संस्था की साख को क्षति तथा संस्था हित में नहीं है। अतः छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम 1960 एवं संस्था की आदर्श उपविधि क्रमांक 09 के प्रावधानो के तहत अरूण राठौर के विरूद्ध जांच कर कार्यवाही किये जाने की अनुशंसा की गई है।
ईगो की लड़ाई में होता है खुलासा,वरना सब जायज
इस तरह के घोटाले और आरोपों से ऐसा नहीं है कि सिर्फ उतरदा समिति ही ग्रसित रही है बल्कि और भी धान उपार्जन समितियां में ऐसे गड़बड़झाले होते रहते हैं। हमने दोनों पक्षों द्वारा की गई शिकायत को उजागर किया जिसमें अरूण राठौर की शिकायत पर जांच में एक पक्ष पर पहले ही जांच समिति ने दोष साबित किया है, और इधर दूसरे पक्ष की शिकायत पर जांच में एसडीएम ने इन्हें दोषी पाया है। कुल मिलाकर यह सारा मामला ईगो की लड़ाई का है। आपस में ईगो टकराया तो शिकवा-शिकायत का दौर शुरू हो जाता है लेकिन जहां सब कुछ मिली-जुली सरकार की तरह चलता है, तो वहां सारे भ्रष्टाचार/गबन, वित्तीय अनियमितता रहस्य के गर्भ में दबे रहते हैं। उतरदा समिति का मामला ऐसे ही ईगो की लड़ाई का परिणाम है।
इस ईगो की लड़ाई में यह तो साबित हुआ है कि धान खरीदी केंद्रों में किस तरह की गड़बड़ियां चलती हैं। ऐसी गड़बड़ियों के बीच से ही विभिन्न धान खरीदी समितियों के द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले प्रदर्शन विज्ञापनों, केन्द्रों में जाने वालों के पेट्रोल-पानी के नाम सेवा-सत्कार का हजारों रुपए का खर्च भी शामिल होता है।



