बांकी में नपाध्यक्ष की जगह पति….! शासन का निर्देश और उद्देश्य ताक पर

कोरबा-बांकीमोंगरा। “महिला आरक्षण का उद्देश्य केवल महिलाओं को निर्वाचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और प्रशासनिक नेतृत्व प्रदान करने का अवसर देना है।”
यह छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा और स्पष्ट उद्देश्य है इसके बावजूद जहां निर्वाचित संवैधानिक पदों पर पत्नी काबिज है, वहां उनके पति अथवा अन्य रिश्तेदार आज भी पूरे अधिकार के साथ शासकीय दौरा व निरीक्षण जैसा कार्य कर रहे हैं, प्रशासनिक कार्यों में बिना अधिकार हस्तक्षेप कायम है। बाँकीमोगरा नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष के पति विकास झा के द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ शासन के दिग्गज नेताओं को टैग किया गया यह वीडियो क्षेत्र में खासकर पालिका में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह बात अलग है कि वे नगर विकास के लिए पार्टी का कार्यकर्ता होने के नाते सक्रिय भूमिका में रहते हैं लेकिन जब शासन ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचित महिला पदाधिकारियों के पति या अन्य रिश्तेदार किसी भी लाइजनर के रूप में/प्रतिनिधि के रूप में ना तो नामांकित की जाएंगे और ना ही कार्य करेंगे तब ऐसे में “अध्यक्ष प्रतिनिधि” होने का दावा करते हुए उनके द्वारा विभिन्न वार्डों में दौरा किया जाना, अधिकारियों को फोन पर चमकाने जैसा निर्देश देना, उनके निरीक्षण के दौरान सरकारी कर्मचारी का मौजूद रहना कई सवालों को जन्म दे रहा है।
शासन की नीति और निर्देश के विरुद्ध जाकर किसी तरह का कार्य किया जाना सत्ता और संगठन के बीच के संबंध में कमजोरी को भी दर्शाता है। इस तरह के और भी घटनाक्रम होते रहते हैं जिससे यह तो साफ है कि शासन के निर्देश का पालन संगठन से जुड़े लोगों के लिए शायद पालनीय नहीं होता ! और यदि होता है, तो इस तरह की नौबत नहीं आती। पालिका अध्यक्ष के पति व रिश्तेदारों को पालिका अध्यक्ष से जुड़े कामकाज, प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखना चाहिए, ऐसा पालिका के लोगों का भी मानना है। जिले में भाजपा के शीर्ष नेतृत्वकर्ताओं को भी चाहिए कि वे अपने सरकार की मंशा/उद्देश्य/निर्देश/नीति/नियमों का अपने पार्टी के लोगों से पालन कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं।



