24 सरकारी क्वार्टरों का हिसाब तलब: बालको प्रबंधन पर उठे सवाल, सात दिन में जांच रिपोर्ट के निर्देश

पीडब्ल्यूडी के पुराने पत्र में बिना अनुमति आवासीय परिसर तोड़ने का उल्लेख; शिकायत के बाद प्रमुख अभियंता कार्यालय ने मांगा तथ्यात्मक प्रतिवेदन
कोरबा। पावर हब न्यूज नेटवर्क पुलिस परिवारों के लिए सरकारी धन से बनाए गए 24 आवासों को तोड़े जाने का मामला फिर प्रशासनिक पड़ताल के केंद्र में है। प्रमुख अभियंता, लोक निर्माण विभाग के कार्यालय ने शिकायत का शीघ्र परीक्षण कर सात दिन के भीतर तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
यह प्रकरण केवल भवनों के ध्वस्तीकरण तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि सरकारी संपत्ति तोड़ने की अनुमति किसने दी और विभाग द्वारा आपराधिक कार्रवाई का अनुरोध किए जाने के बाद क्या कदम उठाए गए?
9 अक्टूबर 2026 के पत्र में मुख्य अभियंता, बिलासपुर परिक्षेत्र को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसमें मंत्रालय के 29 सितंबर 2026 के पत्र और शिकायतकर्ता अब्दुल सुल्तान के 14 सितंबर 2026 के आवेदन का संदर्भ है।
पीडब्ल्यूडी ने 2023 में ही उठाया था मामला
कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग, कोरबा संभाग के 14 मार्च 2023 के पत्र क्रमांक 1841/शिल्प/2023 के अनुसार, बालको थाना के पीछे वर्ष 1991–92 में 24 आई-टाइप आवास बनाए गए थे। विभाग ने लिखा था कि बालको प्रबंधन ने आवासीय परिसर पूर्णतः तोड़ दिया और इसके लिए पीडब्ल्यूडी अथवा पुलिस प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई।
इसी पत्र में बालको प्रबंधन के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया था।
अब संबंधित कार्यालयों को स्पष्ट करना चाहिए कि उस पत्र का परिणाम क्या रहा। क्या जांच हुई, प्रबंधन से दस्तावेज मांगे गए और कोई निर्णय लिया गया?
पुरानी निर्माण लागत, वर्तमान नुकसान का अंतिम आंकड़ा नहीं
विभागीय पत्र में आवासों के निर्माण पर ₹13,90,354 का ऐतिहासिक व्यय दर्ज है। वर्तमान नुकसान का निर्धारण अलग तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन से होना चाहिए। शिकायत में निर्माण, स्वामित्व, हस्तांतरण, ध्वस्तीकरण की अनुमति और मलबा निस्तारण के अभिलेख सुरक्षित करने की मांग की गई है।
प्रमुख अभियंता कार्यालय का पत्र जांच रिपोर्ट मांगने का निर्देश है। उपलब्ध सामग्री से एफआईआर दर्ज होने या किसी की आपराधिक जिम्मेदारी तय होने की पुष्टि नहीं होती। बालको प्रबंधन का पक्ष और अंतिम जांच प्रतिवेदन भी उपलब्ध नहीं हैं।
अब प्रशासन के सामने सीधी चुनौती है—24 सरकारी आवासों के मामले में अनुमति, नुकसान और जिम्मेदारी का स्पष्ट हिसाब सामने लाना।



