HIG-30 की भवन अनुमति किस आदेश पर? संभागायुक्त कार्यालय ने कलेक्टर को भेजी शिकायत, कार्रवाई की जानकारी देने के निर्देश

प्रकरण 2863 में विधिवत नियमितीकरण आदेश के बिना भवन अनुज्ञा जारी करने का आरोप; मूल फाइल और स्वीकृतियों के परीक्षण से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
कोरबा। पावर हब न्यूज नेटवर्क पंडित रविशंकर शुक्ल नगर स्थित HIG-30 की भवन अनुमति को लेकर उठे सवाल अब कलेक्टर कोरबा तक पहुंच गए हैं। आयुक्त कार्यालय, बिलासपुर संभाग ने शिकायत पर नियमानुसार समुचित कार्रवाई करने और आवेदक को कृत कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
मामले का केंद्रीय प्रश्न है—क्या भवन अनुज्ञा जारी करने से पहले जिला नियमितीकरण प्राधिकारी का विधिवत आदेश उपलब्ध था?
उपलब्ध ज्ञापन क्रमांक GENS/62501/शिकायत/2026 में अब्दुल सुल्तान का आवेदन आवक क्रमांक 2848, दिनांक 15 सितंबर 2026 के साथ दर्ज है। ज्ञापन पर उपायुक्त (विकास), बिलासपुर संभाग हरिशंकर चौहान के 6 अक्टूबर 2026 के डिजिटल हस्ताक्षर हैं।
शिकायत में अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
ज्ञापन में दर्ज शिकायत के अनुसार, प्रकरण क्रमांक 2863 में सक्षम प्राधिकारी के विधिवत आदेश के बिना संपदा अधिकारी/भवन अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा कथित नियम-विरुद्ध भवन अनुज्ञा जारी की गई।
शिकायत में अनुमति स्थगित करने, संबंधित अधिकारियों को प्रकरण से हटाने, ई-फाइल जब्त करने तथा विभागीय एवं आपराधिक जांच की मांग की गई है।
ये शिकायतकर्ता की मांगें हैं; उपलब्ध ज्ञापन ने इन्हें अंतिम आदेश के रूप में स्वीकार नहीं किया है।
फाइल बताएगी—किसने जांचा, किसने मंजूरी दी?
इस प्रकरण की स्थिति स्पष्ट करने के लिए नियमितीकरण आदेश, स्वीकृत नक्शा, भवन अनुज्ञा और ई-फाइल में दर्ज टिप्पणियों का मिलान आवश्यक है। इससे पता चलेगा कि किस स्तर पर दस्तावेजों का परीक्षण हुआ और अंतिम अनुमति का आधार क्या था।
नगर निगम को अनुमति की वैधता का उत्तर संबंधित आदेश और अभिलेखों से देना चाहिए। प्रक्रिया सही है तो उसके प्रमाण सामने आएं; कमी मिलती है तो जिम्मेदारी तय हो।
कलेक्टर को शिकायत भेजे जाने के बाद अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि परीक्षण किसे सौंपा गया और क्या निर्णय लिया गया। संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष तथा अंतिम निष्कर्ष अभी उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं हैं।
मामले का समाधान केवल पत्र आगे बढ़ाने से नहीं होगा—कारणों और दस्तावेजों के साथ स्पष्ट निर्णय जरूरी है।



