
ग्राम यात्रा को ‘भ्रामक’ बताने से पहले जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं? छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन का भरोसा मजबूत करने के लिए पौधा खरीदी, HIG-30, सभागार और एफडीआर का दस्तावेजी हिसाब सामने रखे निगम प्रशासन
कोरबा। छत्तीसगढ़ पावर हब न्यूज नेटवर्क। नगर निगम कोरबा के कामकाज पर उठे सवाल अब समाचारों के खंडन और पोर्टल के पंजीयन की जांच तक पहुंच गए हैं। निगम ने ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की खबरों को तथ्यहीन, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण बताया है। लेकिन इस विवाद में जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अभी भी वही है—पौधा खरीदी, भवन अनुमति, सभागार के खर्च और वित्तीय व्यवस्थाओं पर उठे सवालों का दस्तावेजी उत्तर क्या है?
कोरबा नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय से स्पष्ट जवाब अपेक्षित है। क्या निगम का खंडन किसी स्वतंत्र जांच और अभिलेखों के मिलान पर आधारित है? यदि हां, तो संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। यदि जांच लंबित है, तो खबरों और शिकायतों को सामूहिक रूप से खारिज करने का आधार बताया जाए।
छत्तीसगढ़ में सुशासन का दावा स्थानीय स्तर पर खुली जानकारी, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही से मजबूत होगा। आयुक्त महोदय, दस्तावेज सामने रखकर संशय दूर कीजिए।
खंडन के साथ प्रमाण कहां हैं?
उपलब्ध निगम विज्ञप्ति में नागरिकों से ग्राम यात्रा की खबरों की अनदेखी करने की अपील की गई है। निगम की शिकायत पर शासन द्वारा पोर्टल के रजिस्ट्रेशन की जांच कराए जाने का दावा भी किया गया है।
निगम को अपना पक्ष रखने का अधिकार है। लेकिन तथ्यात्मक प्रतिवाद में यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस खबर का कौन-सा तथ्य गलत है और उसके समर्थन में कौन-सा अभिलेख मौजूद है।
कौन-सी तारीख गलत बताई गई? कौन-सा दस्तावेज असंबद्ध है? किस आपूर्ति को गलत निविदा से जोड़ा गया? किस तकनीकी आपत्ति का निस्तारण पहले ही हो चुका था?
इन प्रश्नों के उत्तर खबरवार दिए जाएं। व्यापक खंडन से प्रत्येक प्रकरण की वास्तविक स्थिति अपने आप स्पष्ट नहीं होती।
पौधा खरीदी: शासन ने जांच प्रतिवेदन मांगा, नतीजा क्या निकला?
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के 28 सितंबर 2026 के पत्र क्रमांक GENCOR-35/8388/2026-UAD/530923 में नगर निगम कोरबा की 3,290 पौधों की दो GeM बोलियों, बोली प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले परिसर में पौधे पहुंचाए जाने तथा पूर्व पौधरोपण संबंधी शिकायत का उल्लेख है।
अवर सचिव आनंद कुमार पटेल के डिजिटल हस्ताक्षर वाले पत्र में नोडल अधिकारी/सहायक संचालक आर.डी. मेहरा को उल्लिखित तथ्यों की जांच कर अभिमत सहित प्रतिवेदन विभाग को तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है।
अब निगम और संबंधित जांच प्राधिकारी बताएं—प्रतिवेदन तैयार हुआ या नहीं? किन अभिलेखों का मिलान हुआ? शिकायत के प्रत्येक बिंदु पर निष्कर्ष क्या है?
उपलब्ध सामग्री में अंतिम जांच रिपोर्ट संलग्न नहीं है। इसलिए रिपोर्ट के अस्तित्व, स्थिति और निष्कर्ष का स्पष्ट उत्तर जरूरी है।
“Umesh Sir” की खेप पर रिकॉर्ड का मिलान निर्णायक होगा
संभागायुक्त कार्यालय के ज्ञापन क्रमांक GENS/60761/शिकायत/2026, जिस पर 28 सितंबर 2026 का डिजिटल हस्ताक्षर है, में पौधा खरीदी संबंधी शिकायत दर्ज है।
इसमें “Umesh Sir” के नाम से कथित 650 पौधों की खेप, वाहन क्रमांक CG04 RB 0409 और पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार परिसर में पौधे पहुंचाए जाने का उल्लेख है। शिकायत में CCTV, गेट रजिस्टर, GeM ऑडिट ट्रेल, GST इनवॉइस, ई-वे बिल और परिवहन भुगतान संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
यह शिकायत कलेक्टर को नियमानुसार कार्रवाई के लिए भेजी गई थी।
केवल पर्ची पर नाम होने से संबंधित व्यक्ति की पहचान, निगम की खरीद अथवा अनियमित भुगतान सिद्ध नहीं होता। इसीलिए निगम का कार्यादेश, खेप का चालान, प्राप्ति प्रमाणपत्र और स्टॉक रिकॉर्ड एक साथ देखना आवश्यक है।
पुराना कार्यादेश अलग है तो उसकी पूरी जानकारी रखिए
निगम का पक्ष है कि पौधों की खरीदी पूर्व अधिकृत कार्यादेश के तहत हुई थी, जबकि जिला खनिज न्यास संस्थान मद से प्रस्तावित पौधरोपण और संधारण की नई निविदा अलग प्रक्रिया है। निगम ने दोनों को जोड़कर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
इस स्पष्टीकरण की पुष्टि के लिए पुराने कार्यादेश का क्रमांक, तारीख, एजेंसी, संख्या, प्रजातियां, दरें और आपूर्ति स्थल सार्वजनिक किए जाएं। संबंधित खेप का चालान, प्राप्ति, स्टॉक और भुगतान विवरण भी सामने आए।
यदि दोनों प्रक्रियाएं अलग हैं, तो अभिलेखों में उनका अंतर स्पष्ट दिखेगा। यदि किसी खबर में गलत संबंध जोड़ा गया है, तो उसका तथ्यात्मक सुधार होना चाहिए। यदि रिकॉर्ड में विसंगति है, तो उसकी जांच होनी चाहिए।
HIG-30: सक्षम प्राधिकारी का अंतिम निर्णय दिखाइए
संभागायुक्त कार्यालय के ज्ञापन क्रमांक GENS/62501/शिकायत/2026, जिस पर 6 अक्टूबर 2026 का डिजिटल हस्ताक्षर है, में HIG-30, पंडित रविशंकर शुक्ल नगर, प्रस्ताव क्रमांक 2863 संबंधी शिकायत का उल्लेख है।
शिकायत में जिला नियमितीकरण प्राधिकारी के विधिवत आदेश के बिना कथित नियमविरुद्ध भवन-अनुज्ञा जारी करने का आरोप है। इसे कलेक्टर को नियमानुसार कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
निगम का कहना है कि अनुमति माननीय हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में अर्थदंड और आवश्यक शुल्क लगाकर दी गई। वहीं उपलब्ध पूर्व रिकॉर्ड में एफएआर और ग्राउंड कवरेज संबंधी तकनीकी आपत्तियां भी दर्ज हैं।
आयुक्त आशुतोष पाण्डेय बताएं—सक्षम प्राधिकारी का अंतिम निर्णय कौन-सा है? तकनीकी आपत्तियां कैसे दूर हुईं? अंतिम स्वीकृत नक्शा और संबंधित नोटशीट क्या कहते हैं?
संबंधित आदेश सार्वजनिक होने से निगम के दावे और शिकायत के आरोपों का वास्तविक परीक्षण संभव होगा।
सभागार और एफडीआर का हिसाब भी सार्वजनिक हो
जवाहरलाल नेहरू सभागार के फर्नीचर, पब्लिक एड्रेस, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, साउंड सिस्टम तथा अन्य कार्यों पर ग्राम यात्रा ने पहले प्रश्न उठाए थे। उपलब्ध निगम खंडन में इन कार्यों की मदवार आपूर्ति और भुगतान का विशिष्ट विवरण नहीं है।
निगम संबंधित निविदाएं, स्वीकृत दरें, कार्यादेश, वास्तविक आपूर्ति, निरीक्षण प्रमाणपत्र, वारंटी और भुगतान रिकॉर्ड सामने रखे। अनुमानित लागत, स्वीकृत ठेका राशि और वास्तविक भुगतान अलग-अलग स्पष्ट किए जाएं।
इसी प्रकार एफडीआर और अमानत राशि को सुरक्षित एवं नियमसम्मत बताने के साथ बैंकवार विवरण, नवीनीकरण, सत्यापन और लेखा-मिलान रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए।
सार्वजनिक धन की सुरक्षा का दावा जांचने योग्य रिकॉर्ड से समर्थित होना चाहिए।
पंजीयन की जांच से वित्तीय सवालों का उत्तर नहीं मिलता
पोर्टल के पंजीयन संबंधी जांच का दावा किया गया है तो शिकायत की प्रति, सक्षम प्राधिकारी का आदेश, लागू प्रावधान और जांच का दायरा भी स्पष्ट किया जाए।
ग्राम यात्रा के संपादक अब्दुल सुल्तान ने इस कार्रवाई को जनहित की रिपोर्टिंग पर दबाव बनाने का प्रयास बताया है। यह उनका आरोप है, जिसकी पुष्टि या खंडन संबंधित पत्राचार और कार्रवाई के क्रम से होगा।
क्या जांच की कार्रवाई खबरों को दबाने या मूल मुद्दों से ध्यान हटाने का माध्यम बन रही है? इस आशंका को दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका है—नियामकीय कार्रवाई का आधार और निगम के कामकाज की जांच रिपोर्ट, दोनों सार्वजनिक करना।
किसी अधिकारी या संस्था के विरुद्ध भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध सामग्री से नहीं निकाला जा सकता। लेकिन इस गंभीर आशंका का समाधान भी स्वतंत्र परीक्षण और पारदर्शी जवाब से ही होगा।
सुशासन की विश्वसनीयता पर संशय क्यों बना रहने दें?
छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन के संकल्प के अनुरूप स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा है कि शिकायतों का निष्पक्ष परीक्षण हो और जनता को कारणयुक्त निष्कर्ष मिले।
आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, यदि संबंधित निर्णय नियमसम्मत हैं तो समर्थक अभिलेख सामने रखिए। यदि जांच में कमी सामने आती है तो उसे स्वीकार कर सुधार और कार्रवाई सुनिश्चित कीजिए।
सरकार की छवि पर उठ रहे प्रश्नों का उत्तर देने का अवसर निगम प्रशासन के पास है। सुशासन का भरोसा मजबूत करने के लिए विवादित मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी की घोषणा
संपादक अब्दुल सुल्तान ने आयुक्त आशुतोष पाण्डेय सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका और कथित दबावपूर्ण कार्रवाई को लेकर माननीय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी की बात कही है।
उन्होंने संबंधित ई-फाइलें, नोटशीट, खरीद एवं भुगतान रिकॉर्ड, पोर्टल लॉग, पत्राचार और उपलब्ध CCTV सामग्री सुरक्षित रखने की मांग की है।
फिलहाल यह याचिका दायर करने की तैयारी की घोषणा है; याचिका दाखिल होने अथवा न्यायालय द्वारा कोई आदेश पारित होने की पुष्टि नहीं है।
छत्तीसगढ़ पावर हब न्यूज नेटवर्क का सवाल स्पष्ट है—खंडन में आरोपों को नकारा गया है, अब संबंधित प्रमाण और जांच निष्कर्ष भी सार्वजनिक किए जाएं। पौधों का कार्यादेश, HIG-30 का सक्षम निर्णय, सभागार का भुगतान और एफडीआर का हिसाब ही हकीकत स्पष्ट करेंगे।
यह रिपोर्ट उपलब्ध शासकीय पत्रों, निगम के खंडन और पूर्व प्रकाशित प्रश्नों पर आधारित है। शिकायत अग्रेषित होने या जांच के निर्देश को भ्रष्टाचार की पुष्टि नहीं माना गया है। निगम ने अनियमितताओं से इनकार किया है। अंतिम जांच निष्कर्ष और विस्तृत दस्तावेजी पक्ष प्राप्त होने पर उन्हें प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ पावर हब न्यूज नेटवर्क



