2 साल बाद भी क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण अधूरा, फिनिशिंग-इंटीरियर वर्क में लगेंगे कई माह

कोरबा- क्रिटिकल केयर में ब्लॉक मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर होगा जो डिजिटल उपकरणों से सुसज्जित रहेगा। भीर मरीजों के लिए इमरजेंसी आईसीयू सुविधा होगी। सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल होकर पहुंचने वाले मरीजों के लिए ट्रॉमा केयर यूनिट होगा। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के उपचार के लिए बर्न वार्ड, किडनी के मरीजों के लिए डायलिसिस यूनिट, 24 घंटे आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की अलग से तैनाती रहेगी।
क्रिटिकल केयर ब्लॉक निर्माण के लिए जिला अस्पताल परिसर में कैजुअल्टी के सामने पार्किंग की जमीन को चिह्नित कर वहां लगे पेड़ों को काटने अनुमति ली गई। पहले इसमें ही समय लग गया। वर्क ऑर्डर मिलने के बाद निर्माण कार्य के लिए ड्राइंग-डिजाइन में बदलाव के चक्कर में शुरुआती 6 से 7 महीने कार्य शुरू ही नहीं हो सका। बाद में बारिश बाधा बन गई। एक साल की अवधि पूरी होते-होते भूतल पर कॉलम लगाकर स्ट्रक्चर तैयार अर्थात महज 10 फीसदी काम हुआ था।
अब तक करीब 80 फीसदी काम हो चुका है, इस तरह 70 फीसदी काम 1 साल की अवधि में पूरा किया गया। एक्सटेंशन देकर अधिकारी दिसंबर तक कार्य पूरा होने की उम्मीद रखे हुए हैं। निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर ब्लॉक गंभीर मरीजों की जान बचाने में मिलेगी मदद क्रिटिकल केयर ब्लॉक योजना केंद्र सरकार के एक बड़े स्वास्थ्य मिशन का हिस्सा है, जिसमें गंभीर मरीजों को त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सेवा मुहैया कराई जाएगी। देश के सभी जिलों में क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण कराया जा रहा है, जहां एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम और अत्याधुनिक उपकरणों से लैस व प्रशिक्षित टीम तैनात रहेगी। जिससे क्रिटिकल केस दिल का दौरा, दुर्घटना में लगी गंभीर चोटें, भारी रूप से झुलसे मरीज समेत अन्य गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।
| कोरबा मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में गंभीर मरीजों को क्रिटिकल केयर सुविधा के लिए अभी कई महीने इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि निर्धारित समय के बाद भी 12 करोड़ की लागत से बन रहे 50 बिस्तर का क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में न्यूरो और कार्डियो से जुड़े गंभीर केस रेफर करने पड़ रहे हैं। देश के नक्शे में मिनी भारत के रूप में पहचान बनाने वाले कोरबा में राज्य बनने के 26 साल बाद भी सरकारी न्यूरो और कार्डियो केयर की सुविधा नहीं है। केंद्र सरकार की योजना के तहत मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में 12 करोड़ की लागत से जी-4 लेवल क्रिटिकल केयर ब्लॉक निर्माणाधीन है लेकिन गति धीमी होने से 2 साल पूरे होने के बाद भी भवन अब तक अधूरा बना है। प्रोजेक्ट की गति देखकर साफ है कि भवन तैयार होने के बाद फिनिशिंग और इंटीरियर वर्क पूरा होने में कई महीने और लग जाएंगे।
जबकि अस्पताल प्रबंधन इमरजेंसी व कई महत्वपूर्ण सुविधाओं को शुरू करने के लिए क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनने का इंतजार कर रहा है। दूसरी ओर क्रिटिकल केयर सर्विस शुरू नहीं होने से न्यूरो से जुड़े हेड इंजरी व कार्डियो से संबंधित हार्ट अटैक के केस में मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना अस्पताल प्रबंधन की मजबूरी बन रही है। औद्योगिक जिला होने के कारण जिले में हर दिन रोड एक्सीडेंट होते हैं, जिसमें ज्यादातर केस हेड इंजरी के होते हैं। ऐसे केस में गोल्डन ऑवर में क्रिटिकल केयर नहीं मिलने से मरीजों की जान चली जाती है। औसतन हर दिन 1 क्रिटिकल केस मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचता है जिसमें मरीज को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है।



