
कोरबा। कोरबा शहर के हृदय स्थल पर करोड़ों रुपए की शासकीय नजूल भूमि से जुड़े कथित कब्जे और जमीन घोटाले का मामला अब और भी गंभीर होता जा रहा है। पहले सामने आए दस्तावेज, सैटेलाइट मैप और जमीनी साक्ष्यों के बाद अब जांच प्रक्रिया और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही क्षेत्र में दो-दो तरह के कब्जे और उपयोग की स्थिति सामने आने के बावजूद आज तक स्पष्ट जांच प्रतिवेदन सामने नहीं आया है।
आखिर जांच के बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
एक माह पहले हुई थी कई बार स्थल जांच
स्थानीय सूत्रों और आसपास के लोगों के अनुसार लगभग एक माह पूर्व राजस्व विभाग, पटवारी और जांच दल द्वारा संबंधित स्थल का दो से तीन बार निरीक्षण किया गया था। मौके पर माप-जोख, सीमांकन और दस्तावेजों की जांच भी की गई थी।
लोगों का कहना है कि जांच टीम कई बार मौके पर पहुंची, लेकिन उसके बाद पूरे मामले में असामान्य चुप्पी छा गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच पूरी हो चुकी थी, तो आज तक राजस्व अमले द्वारा जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत क्यों नहीं किया गया?
बड़े लेन-देन और “सेटिंग” की चर्चा तेज
सूत्रों के हवाले से यह चर्चा भी सामने आ रही है कि पूरे मामले को दबाने के लिए बड़े स्तर पर लेन-देन और “सेटिंग” की कोशिशें चल रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई को जानबूझकर धीमा रखा जा रहा है ताकि समय बीतने के साथ मामला कमजोर पड़ जाए।
क्या प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच रिपोर्ट रोकी गई?
क्या बड़े लेन-देन के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है?
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच रिपोर्ट में लगातार हो रही देरी ने संदेह और सवाल दोनों बढ़ा दिए हैं।
एक ही जमीन पर दो-दो कब्जे का आरोप
पहले सामने आए दस्तावेजों और सैटेलाइट मैप में यह दावा किया गया था कि संबंधित क्षेत्र में अलग-अलग खसरा नंबर दर्ज होने के बावजूद जमीन का वास्तविक उपयोग एकीकृत रूप में किया जा रहा है।
“vinod trad” नाम से चिन्हित लगभग 1904.69 वर्गमीटर क्षेत्र को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए थे।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि शासकीय भूमि पर बड़े पैमाने पर कब्जा कर आलीशान कॉम्प्लेक्स और घर परिसर का निर्माण किया गया है।
सुशासन त्योहार बनाम ज़मीनी हकीकत
एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार “सुशासन त्योहार” मना रही है और पारदर्शी प्रशासन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर के प्रमुख इलाके में करोड़ों रुपए की शासकीय संपत्ति पर कथित कब्जे और निर्माण को लेकर कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े कर रहा है।
- शासकीय भूमि पर आलीशान कॉम्प्लेक्स और घर परिसर का निर्माण किया गया है,
- बहुत बड़े भूभाग पर कब्जा किए जाने के आरोप हैं,
- शिकायत और जांच निर्देश के बावजूद कार्रवाई आगे बढ़ती दिखाई नहीं दे रही।
कलेक्टर के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं?
सूत्रों के अनुसार मामले की शिकायत कलेक्टर के समक्ष की गई थी, जिसके बाद जांच के निर्देश भी दिए गए थे। लेकिन अब तक न तो स्पष्ट रिपोर्ट सामने आई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई।
यही वजह है कि अब पूरे मामले में राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है?
या फिर पूरे मामले को दबाने की तैयारी चल रही है?
जनता जवाब चाहती है
अब जनता यह जानना चाहती है कि:
- जांच प्रतिवेदन आखिर कब आएगा?
- स्थल निरीक्षण के बाद क्या निष्कर्ष निकला?
- क्या वास्तव में शासकीय भूमि पर कब्जा हुआ है?
- और यदि हुआ है तो कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई?
- क्या प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है?
यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई बड़े नाम और प्रशासनिक स्तर की गंभीर लापरवाही सामने आ सकती है।



