पसान बंद के बाद जागेगा प्रशासन? ग्रामीणों के सवालों पर अब तक ठोस आश्वासन नहीं, कार्यशैली पर उठे सवाल

कोरबा / पसान। पसान क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बिजली व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क निर्माण, कॉलेज और अस्पताल जैसी मूलभूत मांगों को लेकर ग्रामीणों ने 11 अगस्त को पसान बंद का आह्वान किया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन ग्राम बंद होने के बाद ही हरकत में आएगा, या उससे पहले ही ग्रामीणों को कोई ठोस आश्वासन मिलेगा?
पसान, बैरा, कोटमार, सेंदमार, तेलियामार और कुम्हारीसानी सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन समाधान की दिशा में अपेक्षित गंभीरता नजर नहीं आ रही।
बिजली व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक नाराजगी
ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में बिजली व्यवस्था को दुरुस्त कर सुचारु आपूर्ति, पसान में MBBS डॉक्टर की व्यवस्था, PM ( पोस्टमार्टम )व्यवस्था पसान में ही करने, सड़क निर्माण कार्यों में अनियमितता रोकने, पसान में कॉलेज खोलने और CSC अस्पताल की सुविधा उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल हैं।
ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर प्रशासन को समस्याओं के समाधान के लिए ग्राम बंद जैसे बड़े कदम का इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? यदि मांगें जायज हैं और क्षेत्र की जनता लंबे समय से परेशानी झेल रही है, तो समय रहते प्रशासन की ओर से ठोस पहल क्यों नहीं की गई?
बंद से पहले आश्वासन या फिर आंदोलन के बाद कार्रवाई?
अब निगाह प्रशासन के रुख पर है। क्या प्रशासन ग्रामीणों से संवाद कर पसान बंद से पहले ही मांगों के समाधान को लेकर स्पष्ट और लिखित आश्वासन देगा? या फिर बंद के बाद ही अधिकारियों की सक्रियता दिखाई देगी?
ग्रामीणों की नाराजगी को देखते हुए प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ बंद को रोकने की नहीं, बल्कि जनता के भरोसे को कायम करने की भी है। यदि समय रहते समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन आगे और व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन जनता की आवाज सुनकर पहले ही जागेगा, या पसान बंद के बाद ही कार्रवाई शुरू होगी?



